What is the hierarchy of courts in India? How are judges appointed in these courts?

India has a three-tiered judicial system comprising the Supreme Court, High Courts, and subordinate courts. The Constitution of India is the supreme law of the land, and the judiciary is the guardian of the Constitution.

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Hierarchy of Courts in India

1. Supreme Court of India:

The Supreme Court of India is the land’s highest court and the final court of appeal. It is located in New Delhi and consists of the Chief Justice of India and 33 other judges. The jurisdiction of the Supreme Court extends to the whole of India.

2. High Courts:

Each state in India has its own High Court, which is that state’s highest court. The High Courts have original and appellate jurisdiction. They hear appeals from subordinate courts and also have the power to issue writs.

3. Subordinate Courts:

Subordinate Courts are the lowest courts in the judicial system. They consist of district courts, session courts, and lower courts. They have original jurisdiction in civil and criminal matters.

What is the hierarchy of courts in India? How are judges appointed in these courts?

Appointment of Judges in India

The appointment of judges in India is a complex and lengthy process that involves several steps. The process of appointment of judges is governed by the Constitution of India and the Judges (Appointments and Conditions of Service) Act, 1951. Here is a step-by-step guide to the appointment of judges in India:

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1. Recommendations by the High Court and Chief Justice of India:

The High Court recommends candidates for appointment as judges to the Chief Justice of India (CJI). The CJI also recommends candidates for appointment to the Supreme Court.

2. Formation of the Collegium:

The Collegium is a group of senior judges of the Supreme Court, which is responsible for the appointment of judges. The Collegium consists of the CJI and the four senior-most judges of the Supreme Court.

3. Screening and Evaluation:

The Collegium examines the recommendations and evaluates the suitability of the candidates. They consider factors like seniority, legal expertise, and integrity.

4. Consultation with the Government:

The Collegium consults with the government and seeks their opinion on the recommendations. However, the government has no veto power over the appointments.

5. Appointment by the President:

The President of India appoints the judges based on the recommendations of the Collegium.

Conclusion:

The Indian judiciary plays a vital role in upholding the rule of law and protecting the fundamental rights of citizens. The hierarchy of courts in India provides a robust framework for the resolution of disputes. The appointment of judges in India is a rigorous process that ensures that only the most competent and qualified candidates are appointed to the bench.

भारत में त्रिस्तरीय न्यायिक प्रणाली है जिसमें सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालय शामिल हैं। भारत का संविधान देश का सर्वोच्च कानून है और न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है।

भारत में न्यायालयों का पदानुक्रम

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1. भारत का सर्वोच्च न्यायालय:

भारत का सर्वोच्च न्यायालय भूमि का सर्वोच्च न्यायालय और अपील की अंतिम अदालत है। यह नई दिल्ली में स्थित है और इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और 33 अन्य न्यायाधीश शामिल हैं। सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र पूरे भारत में फैला हुआ है।

2. उच्च न्यायालय:

भारत में प्रत्येक राज्य का अपना उच्च न्यायालय है, जो उस राज्य का सर्वोच्च न्यायालय है। उच्च न्यायालयों के पास मूल और अपीलीय क्षेत्राधिकार है। वे अधीनस्थ न्यायालयों से अपील सुनते हैं और रिट जारी करने की शक्ति भी रखते हैं।

3. अधीनस्थ न्यायालय:

न्यायिक प्रणाली में अधीनस्थ न्यायालय सबसे निचली अदालतें हैं। इनमें जिला अदालतें, सत्र अदालतें और निचली अदालतें शामिल हैं। उनके पास नागरिक और आपराधिक मामलों में मूल अधिकार क्षेत्र है।
भारत में न्यायालयों का पदानुक्रम क्या है? इन न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति किस प्रकार की जाती है?

भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति

भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है जिसमें कई चरण शामिल हैं। न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया भारत के संविधान और न्यायाधीश (नियुक्ति और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1951 द्वारा शासित है। यहां भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका दी गई है:

1. उच्च न्यायालय और भारत के मुख्य न्यायाधीश की सिफारिशें:

उच्च न्यायालय भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों की सिफारिश करता है। CJI सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों की सिफारिश भी करता है।

2. कॉलेजियम का गठन:

कॉलेजियम सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों का एक समूह है, जो न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए जिम्मेदार है। कॉलेजियम में CJI और सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल हैं।

3. स्क्रीनिंग और मूल्यांकन:

कॉलेजियम सिफारिशों की जांच करता है और उम्मीदवारों की उपयुक्तता का मूल्यांकन करता है। वे वरिष्ठता, कानूनी विशेषज्ञता और सत्यनिष्ठा जैसे कारकों पर विचार करते हैं।

4. सरकार के साथ परामर्श:

कॉलेजियम सरकार से परामर्श करता है और सिफारिशों पर उनकी राय लेता है। हालांकि, सरकार के पास नियुक्तियों पर कोई वीटो पावर नहीं है।

5. राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति:

भारत के राष्ट्रपति कॉलेजियम की सिफारिशों के आधार पर न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं।

निष्कर्ष:

भारतीय न्यायपालिका कानून के शासन को बनाए रखने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में अदालतों का पदानुक्रम विवादों के समाधान के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है। भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति एक कठोर प्रक्रिया है जो यह सुनिश्चित करती है कि केवल सबसे सक्षम और योग्य उम्मीदवारों को ही बेंच में नियुक्त किया जाए।

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